मुंबई की मीठी नदी को लेकर केंद्र की लापरवाही का आर.टी.आई ने किया बड़ा खुलासा

मीठी नदी में आई बाढ़ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नदी के चौड़ीकरण और विकास के लिए एक वित्तीय पैकेज की घोषणा की थी।

RTI exposes center's negligence on Mithi River
मुंबई की मीठी नदी। (Wikimedia Commons)

एक आरटीआई (RTI) के जवाब में पता चला है कि केंद्र सरकार ने मुंबई की एकमात्र बहने वाली जल निकाय, मीठी नदी (Mithi River) की सफाई और विकास के लिए कोई भी धनराशि मंजूर नहीं की है। मीठी नदी ने 26 जुलाई 2005 की बाढ़ के दौरान भारी तबाही मचाई थी, जब इसने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक को डूबो दिया था और कई क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया था।

इसके बाद, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए – MMRDA) ने इसे साफ करने और इसे विकसित करने तथा सीवरेज प्रबंधन और अन्य पहलुओं के लिए भी 1,657.11 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मांगी थी।

इसी बाबत, मुंबई आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता अनिल गलगली ने नदी परियोजना की प्रगति और केंद्र से अब तक प्राप्त धनराशि पर विवरण मांगा।

उन्होंने कहा, “चौंकाने वाली बात है कि आरटीआई जवाब में कहा गया है कि केंद्र ने 26/7 के जलप्रलय के 15 वर्ष बाद एमएमआरडीए को एक पैसा नहीं दिया है।”

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आरटीआई के जवाब के अनुसार, “एमएमआरडीए (MMRDA) ने अपने द्वारा किए गए विकास कार्यो के लिए 417.51 करोड़ रुपये की राशि मांगी थी। इसके अलावा बृहन्मुंबई नगर निगम ने अपने अधिकार क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए 1,239.60 करोड़ रुपये की राशि की मांग की थी।

मीठी नदी (Mithi River) में आई बाढ़ के बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने नदी के चौड़ीकरण और विकास के लिए एक वित्तीय पैकेज की घोषणा की थी।

उसके बाद, राज्य सरकार ने परियोजना को लागू करने के लिए महत्वाकांक्षी मीठी नदी विकास और संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना की, लेकिन केंद्रीय निधियों की अनुपस्थिति में बमुश्किल से केवल 35 प्रतिशत कार्य ही हो सका। (आईएएनएस)

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