शिक्षा के क्षेत्र में 2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर हासिल करने पर जोर

 वर्ष 2020 भारतीय शिक्षा के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी मिली और इस क्षेत्र में बड़े सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ। पूरे उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें 2035 तक भारतीय स्कूलों और कॉलेजों में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 27.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना शामिल है। इसका एक बड़ा हिस्सा भारत में ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने वाली एड-टेक कंपनियों की बढ़ती स्वीकार्यता को आगे बढ़ाएगा।

पिछले वर्ष में महामारी और उसके बाद लगाए गए लॉकडाउन के कारण स्कूलों और विश्वविद्यालयों को फिजिकल तौर पर कक्षा बंद करने पर मजबूर होना पड़ा। इस बीच एड-टेक कंपनियों ने भारत में तेजी दर्ज की है। लॉकडाउन के बाद एड-टेक कंपनियों में दाखिला लेने वाले छात्रों का एक स्पष्ट रुझान देखने को मिला है, क्योंकि उन्हें ऑनलाइन तरीके से सीखने के विकल्प मिल रहे हैं।

भारत में तकनीक अपनाने को लेकर 2019 में कुल 55.3 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ। वहीं एड-टेक स्टार्ट-अप ने 2020 में कुल 2.22 अरब डॉलर का निवेश किया। हालांकि ध्यान विशेष रूप से के-12 और टेस्ट प्रेप सेगमेंट पर रहा। वर्ष 2021 एक प्रतिष्ठित वर्ष बनने के लिए निर्धारित है, जब भारत अतीत की बेड़ियों को तोड़ देगा और उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा के लिए शुरूआती बिंदु होगा।

टैलेंटएज के सीईओ आदित्य मलिक ने एक बयान में कहा, “दुनिया भर में एड-टेक फर्मों के लिए, 2020 एक इन्फ्लेक्शन प्लाइंट रहा। अडोप्शन से लेकर स्थापना, दोनों के संदर्भ में ये फर्म शिक्षा के क्षेत्र में भारत के विकास के मुख्य चालक बन गए हैं। उच्च शिक्षा और परिणाम आधारित शिक्षा में, इस इन्फ्लेक्शन प्वाइंट ने भारतीय-टेक फर्मों के लिए विकास की शानदार यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया। लॉकडाउन ने कक्षा के जरिए सीखने से ऑनलाइन सीखने तक की एक बड़ी पारी सुनिश्चित की है। युवा शिक्षार्थियों और अधिकारियों द्वारा समान रूप से ग्रहण किए जाने पर, कॉर्पोरेट्स और नीति निमार्ताओं से भी व्यापक स्वीकृति के साथ ऑनलाइन और लाइव सीखने की स्वीकृति देखी गई है।”

मलिक ने कहा, “2021 को इतिहास में उस वर्ष के रूप में देखा जाएगा, जब भारत में शिक्षा को वास्तव में अतीत से मुक्त किया जाएगा। यह एक ऐसा साल होगा, जिसे एक विश्वास के लिए शुरूआती बिंदु के रूप में याद किया जाएगा।”

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई नई और प्रगतिशील राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) ने उच्च शिक्षा खंड में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। यह नीति ऑनलाइन उच्च शिक्षा को मुख्यधारा और अत्यधिक समावेशी बनाने की ओर अग्रसर है।

नीतिगत परिवर्तनों का प्रभाव इस वर्ष दिखाई देगा, क्योंकि शीर्ष भारतीय विश्वविद्यालय स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों के लिए ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम प्रदान करेंगे। यह राष्ट्र भर के शिक्षार्थियों को अपने गांवों, कस्बों या शहरों को छोड़े बिना बेहतरीन संस्थानों से उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा का उपयोग करने की अनुमति देगा। यह भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को अनलॉक करते हुए लाखों सपनों को पंख देगा।

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नई नीति ऑनलाइन उच्च शिक्षा को मुख्यधारा और अत्यधिक समावेशी बनाने की ओर अग्रसर है।(Unsplash)

ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई है, जिनमें पता चलता है कि भारत में लगभग 12.2 करोड़ लोगों ने कथित तौर पर अगस्त 2020 में केवल महामारी से संबंधित बंद और लॉकडाउन के कारण अपनी नौकरियों खो दी। इस कारण व्यापार का भी भारी नुकसान हुआ। संकट के दौरान, ऑनलाइन शिक्षा और विशेष रूप से अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग खासतौर पर फुर्तीली और आकर्षक रही। इस प्रवृत्ति के जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि महामारी ने न केवल मौलिक रूप से कंपनियों के डिजिटल परिवर्तन को गति दी है, बल्कि ऑनलाइन सर्टिफिकेशन को भी स्वीकार किया है। इसके अतिरिक्त, नए एनईपी 2020 ने ऑनलाइन डिग्री और दोहरी डिग्री के लिए मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे रोजगार और विकास के अवसरों में तेजी आई है। इसलिए, शिक्षा में प्रौद्योगिकी का प्रभाव इस वर्ष स्कूली शिक्षा से परे होगा। यह डिग्री कार्यक्रमों, अप-स्किलिंग, निरंतर सीखने और री-स्किलिंग में परिलक्षित होगा।

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अब एड-टेक क्षेत्र को अधिक समावेशी, इन्क्लूसिव और अवसरों से भरा बनाने की जिम्मेदारी एड-टेक फर्मों पर है। टैलेंटएज जैसी कंपनियां रिमोट-लनिर्ंग को अधिक लागत प्रभावी, आकर्षक, व्यक्तिगत और आउटकम-ड्रिवन बनाने में मदद करेंगी।

ऑनलाइन शिक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बुनियादी ढांचा है, जिस पर टियर 2 और टियर 3 शहरों में बढ़ी पहुंच के लिए ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके अलावा इंटरनेट की पहुंच बेहतर होने के साथ, सभी गूगल संबंधी प्रश्नों का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आज इन शहरों से आता है। इसके अलावा, भारत में सभी इंटरनेट डेटा उपभोक्ताओं का 50 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण भारत से है। यह इंगित करता है कि भारत में एड-टेक फर्मों के लिए एक उज्‍जवल भविष्य है, क्योंकि आयु-समूहों और भौगोलिक क्षेत्रों में गैर-महानगरों के विद्यार्थियों में वृद्धि जारी है।

भारत में प्रतिष्ठित एड-टेक फर्म दुनिया के प्रमुख संस्थानों और कॉर्पोरेट्स के साथ संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम पेश कर रहे हैं। ऐसी कंपनियों की ओर से पेश किए जा रहे पाठ्यक्रमों के साथ खुद को नामांकित करके विद्यार्थी विभिन्न आकर्षक कैरियर विकल्पों के लिए खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं। ( AK आईएएनएस )

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